आइए आपको खरगोश और कछुए की वह कहानी सुनाते हैं जो आपने आज तक नहीं सुनी होगी

एक बार कछुए की खरगोश से रेस होती है खरगोश ओवरकॉन्फिडेंस में आकर सो जाता है और कछुआ धीमी चाल होते हुए भी जीत जाता है।।

इस कहानी से  यह शिक्षा मिली कि धीमा ही सही लेकिन लगातार चलने वाला जीवन में सफल हो जाता है।
इतनी कहानी तो सभी ने सुनी है आइए इससे आगे की कहानी हम आपको सुनाते है👇👇


कछुए से रेस हारने के बाद खरगोश निराश हो जाता है और अपनी हार पर चिंतन करता है तब उसे समझ आता है कि उसने ओवरकॉन्फिडेंस में आकर गलती कर दी और परिणाम हार के रूप में उसे देखना पड़ा, यदि वह मंजिल पर पहुंचकर ही रुकता तो उसे हार का सामना ना करना पड़ता। जीत की चाह में अगले दिन खरगोश फिर से कछुए को रेस की चुनौती देता है कछुआ कॉन्फिडेंट था इसलिए वह चुनौती स्वीकार कर लेता है और इस बार खरगोश बिना सोए रेस एक बहुत बड़े अंतर से जीत जाता है और कछुए को हरा देता है।
शिक्षा- तेज और लगातार चलने वाला धीमे और लगातार चलने वाले से हमेशा जीत जाता है।
कहानी अभी और भी है दोस्त....

अब अपनी हार से कछुआ परेशान हो जाता है और विचार करता है की कैसे खरगोश को हराया जाए, अगले दिन कछुआ खरगोश को चुनौती देता है और कहता है रेस हो जाये लेकिन रेस का रास्ता वह तय करेगा, खरगोश कॉन्फिडेंट था इसलिए वह भी मान जाता है अगले दिन रेस की शुरुआत होती है, खरगोश तेजी से रास्ते पर चलते हुए आगे बढ़ता है लेकिन रास्ते में उसे तेज धारा-प्रवाह वाली नदी मिलती है वह वहां रुक जाता है, फिर वहां कछुआ पहुंचता है और धीरे धीरे नदी को पार करके मंजिल तक पहुंच जाता है और कछुए को हरा देता है।
शिक्षा-यदि आप अपनी काबिलियत पहचानो और उसके अनुसार अपना रास्ता और मंजिल तय करो तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

कहानी अभी और भी बाकी है मेरे दोस्त.....
यह रेस समाप्त होने के बाद कछुआ और खरगोश दोनों अच्छे दोस्त बन गए उन्होंने एक दूसरे की ताकत को समझा और दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दूसरे की ताकत का सदुपयोग करें तो हम कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं इसीलिए दोनों ने एक साथ मिलकर रेस करने का फैसला किया लेकिन इस बार किसी को हराने के लिए नहीं बल्कि एक टीम के रूप में रिकॉर्ड कायम करने के लिए उन्होंने रेस को करने का फैसला लिया।
रेस एक बार फिर प्रारंभ हुई शुरुआत में खरगोश ने कछुए को अपनी पीठ पर बैठाया और तेजी से दौड़ते हुए नदी किनारे तक पहुंच गया,फिर कछुए की बारी थी कछुए ने अपनी पीठ पर खरगोश को बैठाया और धीरे धीरे नदी को पार करा दिया, फिर एक बार खरगोश ने कछुए को पीठ पर बैठाया और तेजी से मंजिल तक पहुंच गए लेकिन इस बार खुशी ज्यादा थी क्योंकि ना कोई जीता था ना कोई हारा था लेकिन मंजिल दोनों ने प्राप्त की थी और एक रिकॉर्ड बनाया था।।
शिक्षा-टीम वर्क या मिलकर किया गया कार्य हमेशा व्यक्तिगत रूप से किए गए कार्य से बेहतर और सुखद परिणाम देने वाला होता है।
अगर आप को जीतना है तो आपको टीम में काम करना सीखना होगा, आपको अपनी काबिलियत के अलावा दूसरों की ताकत और काबिलियत को भी समझना होगा और जैसी भी परिस्थिति हो उसके हिसाब से अपनी टीम की ताकत को समझ कर उसका उपयोग करना होगा।
यहां एक बात और ध्यान देने वाली है कि खरगोश और कछुआ दोनों ही अपनी हार के बाद निराश होकर बैठे नहीं बल्कि उन्होंने अपनी अपनी स्थिति को समझने की कोशिश की,अपनी हार के कारण को जाना और अपने आप को नई चुनौती के लिए तैयार किया जहां खरगोश ने अपनी हार के बाद अधिक मेहनत की वही कछुए ने अपनी हार को जीत में बदलने के लिए अपनी स्ट्रेटजी में बदलाव किया और एक ऐसे रास्ते का चुनाव किया जो परिणाम उसके पक्ष में करने के लिए जरूरी भी था और काफी भी था।
जब कभी आप फेल हो जाएं या निराशा आपके हाथ लगे तो आप अधिक मेहनत करें या अपनी रणनीति में बदलाव लाएं या फिर आवश्यकता पड़ने पर दोनों ही कार्य करें पर कभी भी हार ना माने, कभी भी निराश ना हो क्योंकि बड़ी से बड़ी हार के बाद भी जीत हासिल की जा सकती है बशर्ते आप अपनी बुद्धि को सजग रखें और अपनी काबिलियत पर विश्वास करें।।

#असंभव_कुछ_भी_नहीं।।

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