हम आजकल देख रहे हैं ज्यादातर सोशल मीडिया के युवा योद्धा भारत-चीन के बीच हुए टकराव को तूल देकर खुदको सुरक्षा सलाहकार ओर विदेश मंत्री से भी अधिक बुद्धिमान बताने की कोशिश में लगे हुए हैं। जबकि पूरा देश जानता है हमारी सैन्य शक्ति तीनों ही विधाओं में कितना दम रखती है और पराक्रम के मामले में तो दुनिया हमारी भारतीय सेना को इजरायल के समतुल्य देखती है ।।
खैर हम बात करते हैं अपने देश में चल रहे एक ओर प्रमुख युद्ध की जिसकी चर्चा तो है लेकिन उसको लेकर गंभीरता दिखाई नहीं देती।।
वह युद्ध है भारतीय सिनेमा को विश्व में पहचान दिलाने वाले बॉलीबुड ओर भारतीय संस्कृति की सदियों से पहचान रहे मर्यादा_ओर_संस्कारों के मध्य हो रहा एक विशाल युद्ध।
एक तरफ बॉलीवुड विश्व में भारत को विख्यात कर रहा है तो दूसरी तरफ वही बॉलीबुड हमारे भारतीय संस्कारों की धज्जियां उड़ा रहा है,सदियों से भारतीयों की मर्यादा,मानवता,संस्कार,परोपकार और सम्मान देने का भाव देश की पहचान बना रहा,भारत ने कभी भी किसी भी देश की सीमा को लांघने का प्रयास नहीं किया,कभी युद्ध की पहल नही की,हमेशा अपने पड़ोसी देशों व मित्रों की भावनाओं का सम्मान किया यही भारत की पहचान है और यही भारत के मूल का भाव।।
लेकिन बॉलीवुड ने जबसे पश्चिमी सभ्यता के साथ नाता जोड़ा है,तभी से भारतीयता का मूल स्वभाव,शुद्ध पहचान धुंधली होने लगी है,आज बॉलीबुड ने हमारे संस्कारों पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं,हमारा जीवन बदल दिया है,आज हम एक दूसरे का सहयोग करने के स्थान पर उसे गिराने का प्रयास करते हैं,बड़े शहरों में तो लोगों को ये भी नहीं पता कि उनका पड़ोसी है कौन,उसको क्या परेशानी है और उस परेशानी के विपरीत समय में हमारा क्या दायित्व बनता है उनके लिए,आज संस्कारों की कमी के कारण बच्चे अपने माता-पिता की इज्जत नहीं करते,उनके बूढ़े हो जाने के बाद उनकी सेवा नहीं करना चाहते उन्हें बृद्धाश्रम में धकेल आते हैं,बेटियां अपना शरीर दिखाने को फैशन समझती हैं,यदि उन्होंने अपने निजी अंगों का प्रदर्शन न किया तो उन्हें गांव के गंवारों में गिना जाएगा ये मानसिकता हो चुकी है समाज की।पिता न सिर्फ अपने बेटों बल्कि अपनी बेटियों के साथ पार्टियों में जाकर साथ बैठकर शराब पी रहे हैं, लिव इन रिलेशनशिप को आधुनिकता का पर्याय माना जा रहा है,ओर भी न जाने क्या क्या है जो कहने लग जाएं तो किताबें भर जायेगीं।
सवाल सिर्फ यही है कि "क्या यही है हमारी संस्कृति, क्या यही है हमारा भविष्य, क्या इसी प्रकार का समाज हम बनाना चाहते हैं??" बहुत सारे सवाल हैं जो आपको अपने दिल से अपने मन से करने हैं।।
हम सिर्फ यही सोचते रहते हैं कि में अकेले कैसे बदलाब लाऊंगा,मेरे करने से समाज थोड़ी बदल जायेगा तो मेरी एक बात सुनिए ओर विचार कीजिये कि "हम बदलाब नहीं ला सकते तो कोई बात नहीं हम खुद तो बदल सकते हैं,अपने बच्चों को,पत्नी को,बहन को छोटे भाइयों को तो समझा सकते हैं क्या यह करना भी असंभव है आपके लिए। नहीं ये असंभव नहीं है आप कर सकते हैं और आपको करना ही होगा क्योंकि जो व्यक्ति अपनी पहचान खो देता है,अपना सम्मान खो देता है वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक क्यों न हो वह खुश नहीं रह सकता। आपको सच्ची खुशी तभी मिलेगी जब आप कुछ ऐसा बदलाब लाने में अपना योगदान देंगें जिसे लोगों ने असंभब मां लिया है।
बहुत सारे उदाहरण हैं जिन्होंने असंभव को संभव बनाया है जिनमें सबसे बड़ा उदाहरण में बिहार के "दशरथ मांझी जी" को मानता हूं उन्होंने उस पहाड़ को अकेले खोद दिया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं कि थी तो यह आपके वस में है नियंत्रण में है अभी प्रयास कीजिये समय है कहीं ऐसा न हो कि आज नहीं कल ओर में नहीं कोई और के चक्कर में आप अपना अस्तित्व अपना स्वाभिमान ओर अपनी पहचान खो दो और फिर पछतावे के अलावा आपके पास कुछ न बचे।।
भारत-चीन की लड़ाई से ज्यादा रुचि आपको बॉलीवुड v/s भारतीय_संस्कृति के युद्ध में लेना चाहिए क्योंकि
चीन को तो हमारे जाँवाज जवान निपटाकर उसको उसकी औकात बता देंगें लेकिन ये बॉलीवुड की नग्नता,अश्लीलता और रंडीपना हमारे संस्कारों के साथ साथ हमारी संस्कृति को भी निपटाकर रख देगा।हमारा दायित्व बनता है कि हम हमारे हिंदूवादी अस्तित्व की रक्षा करें,हमारी संस्कृति की सुरक्षा के लिए आवाज बुलंद करें,हम नहीं करेंगें तो फिर किससे उम्मीद करेंगें, जितनी ताकत आपमें है उतनी किसी ओर में नहीं बस आप हिम्मत कीजिये,आप विरोध कीजिये,अपनी बात मन में न रखिये उसे जाहिर कीजिये क्योंकिं आप चुप रहोगे तो आपका अस्तित्व खतरे में आ जायेगा। आज हम स्वयं को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के लिए चिल्ला रहे हैं लेकिन विश्व पटल पर जाकर देखिये तो आपको पता चलेगा कि विश्व का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र भारत ही है,दुनिया मानती है कि हम हिन्दू राष्ट्र के निवासी हैं फिर आपके मन में शंका क्यों है।
अब यदि आप हिन्दू हैं और हिंदू राष्ट्र के निवासी भी हैं तो आप अपनी ही पहचान क्यों खो रहे हैं??
इसलिए अब जागिये ओर अपने अस्तित्व को बचाने के लिए शोशल मीडिया का सदुपयोग करें न कि भृम फैलाने में समय खराब।।
👏👏👏
जय हिंद,जय भारत
जय हो भारतीय संस्कृति,जय सनातन धर्म
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